कर्नल गगनदीप सिंह 21 राष्ट्रीय राइफल्स के नए कमांडिंग ऑफिसर होंगे। उन्होंने सोमवार सुबह हंदवाड़ा पहुंचकर बटालियन की कमान संभाली है। वह फैसला होने के एक ही दिन में गंगानगर राजस्थान से कश्मीर पहुंच गए हैं। शनिवार-रविवार को हुए एक एनकाउंटर में 21 राष्ट्रीय राइफल्स के कमांडिंग ऑफिसर कर्नल आशुतोष शर्मा शहीद हो गए थे।
सूत्रों के मुताबिक शनिवार-रविवार की रात कर्नल आशुतोष के शहीद होने के फौरन बाद कश्मीर स्थित सेना की 15 वीं कोर और नॉर्दन कमांड उधमपुर ने आर्मी हेडक्वार्टर के साथ मिलकर नए सीओ लाने की कवायद शुरू कर दी थी।
7 अफसरों से पूछा गया- कमांड करने को तैयार हैं?
इसके लिए 7 ऐसे ऑफिसर्स के प्रोफाइल चेक किए गए जो पहले 21 राष्ट्रीय राइफल्स में पोस्टेड रह चुके हैं। उनसे पूछा गया कि वह कमांड करने को तैयार हैं और महज 2 घंटे में उनसे इस पर जवाब मांगा। सभी का जवाब हां था। इसके बाद कर्नल गगनदीप सिंह को इसके लिए चुना गया।
कर्नल जीडी सिंह इससे पहले 2013-15 के बीच भी इसी बटालियन के कमांडिंग ऑफिसर रह चुके हैं। सीओ रहते ही उन्हें वीरता पदक युद्ध सेवा मेडल भी मिला था। फिलहाल वह राजस्थान के गंगानगर में 16 डिविजन के हेडक्वार्टर में स्टाफ ऑफिसर थे।
कर्नल जीडी सिंह ने अहम प्रोफाइल छोड़ मुश्किल रोल चुना
गंगानगर पोस्टिंग से पहले उन्होंने मध्यप्रदेश के महू से हायर कमांड कोर्स किया था। 21 राष्ट्रीय राइफल्स के सीओ रहते ही गगनदीप सिंह सेना के इस अहम कोर्स के लिए गए थे। गगनदीप सिंह गंगानगर से पोस्टिंग पर दिल्ली जाने वाले थे। उन्हें सेना मुख्यालय में डायरेक्टर मिलिट्री ऑपरेशन का प्रोफाइल मिला था। लेकिन, उन्होंने उस अहम प्रोफाइल को छोड़ इस मुश्किल रोल को चुना। गौरतलब है कि आमतौर पर एक बटालिय कमांड करने और फिर हायर कमांड कोर्स करने के बाद ऑफिसर दोबारा बटालियन कमांड करने नहीं जाते।
11 गार्ड ने 300 से ज्यादा आतंकी ढेर किए
कर्नल सिंह भी कर्नल आशुतोष की तरह ब्रिगेड ऑफ गार्ड से हैं और उनकी पेरेंट यूनिट 11 गार्ड है। 21 राष्ट्रीय राइफल्स के ऑफिसर्स और जवान ब्रिगेड ऑफ गार्ड से ही हैं। इस यूनिट ने 300 से ज्यादा आतंकवादियों को मार गिराया है, जिसके बाद यूनिट ट्रिपल सेंचूरियंस कहलाती है।
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