जगन्नाथ रथ यात्रा को लेकर सोमवार को भी कोई बड़ा फैसला नहीं हो पाया। श्री जगन्नाथ मंदिर प्रबंधन समितिकीबैठक में इस बात पर चर्चा की गई कि रथयात्रा के रथ के निर्माण की गतिविधि शुरू की जाए। अक्षय तृतीया (26 अप्रैल) से रथ निर्माण शुरू होना था। लेकिन, लॉकडाउन में निर्माण कार्यों पर लगी रोक के कारण नहीं हो सका। सोमवार को बैठक में इस बात पर चर्चा की गई कि रथ निर्माण कोई धार्मिक गतिविधि नहीं है, इसलिए इसे शुरू किया जाना चाहिए।
श्री जगन्नाथ मंदिर प्रबंधन समितिके गजपति महाराज दिव्यसिंह देब के मुताबिक चूंकि सभी तरह के निर्माण कार्यों को ऑरेंज और ग्रीन इलाकों में छूट दी गई है, सो रथ निर्माण के लिए भी इस छूट को लागू किया जाना चाहिए। हमने सरकार से इसके लिए मांग की है।रथ निर्माण धार्मिक गतिविधियों में नहीं है। फिलहाल, लॉकडाउन में धार्मिक गतिविधियों पर रोक है। इसे लेकर राज्य सरकार से बात की जा रही है। बुधवार को इसे लेकर सरकार फैसला ले सकती है। रथ निर्माण का रास्ता साफ होने से रथयात्रा को लेकर कुछ स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
सोमवार को शाम 4.30 इसे लेकर मंदिर समिति के सदस्यों और प्रशासनिक अधिकारियों ने बैठक की। बैठक में रथयात्रा की तैयारियों को लेकर बात हुई, जिसमें सबसे बड़ा मामला रथ के निर्माण को शुरू कराना था। अभी देशभर में 17 मई तक धार्मिक गतिविधियों पर रोक लगी हुई है। लेकिन, समिति सदस्यों का मत है कि ये रथ का बनाया जाना धार्मिक गतिविधि नहीं है। उसे विश्वकर्मा (कारीगर) बनाते हैं। रथयात्रा के होने की स्थिति में सबसे अनिवार्य है कि रथ तैयार रहे। इस मामले में राज्य और केंद्र दोनों की सरकारों से जल्दी फैसला लेने के लिए कहा गया है।
रथ निर्माण की शुरुआत अक्षय तृतीया से शुरू होनी थी लेकिन लॉकडाउन के चलते ये औपचारिक होकर रह गई। रथ निर्माण शुरू होने में पहले ही 9 दिन की देरी हो चुकी है। मंदिर प्रबंधन समिति इसमें और देर नहीं चाहती लेकिन अंतिम निर्णय सरकार को लेना है। अगर मंगलवार को सरकार रथ निर्माण को हरी झंडी दे देती है तो रथ यात्रा को लेकर चल रही अटकलों पर भी कुछ हद तक विराम लग सकता है।
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